Purna Railway Station: यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों? प्लेटफॉर्म बदलने के खेल में किसका हित साधा जा रहा है.?
पूर्णा, 10 (प्रतिनिधि) Purna Railway Station News क्या रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को दरकिनार कर कुछ ख़ास लोगों के हित साधने में जुटा है? यह सवाल पूर्णा रेलवे स्टेशन की स्थिति देखकर बार-बार उठ रहा है।शहर की ओर स्थित प्लेटफॉर्म क्रमांक 4 पर बाज़ार, टिकट कार्यालय, अस्पताल, स्कूल और कॉलेज हैं। स्वाभाविक है कि यात्रियों का अना जाना ईसी और से है| सब के लिए यही सबसे सुविधाजनक है। लेकिन इसके बावजूद अधिकांश लंबी दूरी की गाड़ियाँ उल्टी दिशा वाले प्लेटफॉर्म क्रमांक 1, 2 और 3 पर ही रोकी जाती हैं। परिणामस्वरूप हज़ारों यात्रियों को फूटओवर ब्रिज पर जान हथेली पर रखकर धक्कामुक्की करनी पड़ती है। बुज़ुर्ग, महिलाएँ, छोटे बच्चे और दिव्यांग यात्री तो और भी ज़्यादा मुसीबत में फँसते हैं।
पुराना पुल टूटा, नया इंतज़ाम शून्य.
स्टेशन का एक फूटओवर ब्रिज पहले ही तोड़ दिया गया है। अब यात्रियों को सिर्फ़ एक ही पुल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। लेकिन रेलवे ने न तो एस्केलेटर की व्यवस्था की और न ही लिफ्ट की। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
क्या ‘महीनेवारी’ का खेल चल रहा है…..?
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि स्टेशन कैंटीन लॉबी का ट्रेनों के प्लेटफॉर्म बदलवाने में सीधा दखल है। आरोप है कि कैंटीन चालक से लेकर कंट्रोल रूम तक ‘महीनेवारी’ का जाल फैला हुआ है। यदि यह सच है, तो यह सीधे-सीधे यात्रियों के साथ धोखा है। आखिर रेलवे विभाग इस पर चुप क्यों है? मीडिया ने बार-बार मुद्दा उठाया, मगर हर बार नांदेड़ मंडल की ओर से सिर्फ़ थातूर-मातूर जाँच कर मामला दबा दिया गया। क्या यह मिलीभगत नहीं..? ईसकी दोबारा कडी जाॅच की जाय और दोषी पाये जाने वालों के उपर सक्त कारवाई की जाय |यह अपेक्षा है|
नए डीआरएम से उम्मीदें
नांदेड़ मंडल के नए मंडल प्रबंधक प्रदीप कामले से अब यात्रियों की बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं। सवाल यह है कि क्या वे इस पुराने खेल का सच सामने लाएँगे? क्या वे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देकर प्रवासीयोंके हित में प्लॅटफॉर्म १ से ३ पर आनेवाली जानेवाली गाडीया शहर की और स्थित प्लॉटफार्म पर से चलाई जाए|
यात्रियों की मांग सीधी है – प्रमुख गाड़ियाँ प्लेटफॉर्म क्रमांक 4 से ही चलनी चाहिए। इससे यात्रियों का समय, श्रम और सुरक्षा – तीनों की रक्षा होगी। लेकिन अगर लापरवाही जारी रही और कोई हादसा हुआ, तो क्या इसकी पूरी ज़िम्मेदारी रेलवे प्रशासन उठाएगा|












