पूर्णा रेलवे स्टेशन परिसर में अतिक्रमण पर प्रशासन का हथौड़ा.!

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अवैध होटल संचालक व ठेलेवालों पर कार्रवाई; जेसीबी से ढांचों को किया गया ध्वस्त

पूर्णा, 4 सितम्बर (संवाददाता) शहर के रेलवे स्टेशन परिसर में पिछले कई महीनों से खड़े अवैध होटल और ठेलों के अतिक्रमण पर आखिरकार रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। गुरुवार (4 सितम्बर) की सुबह रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे, तो अवैध व्यावसायिकों में हड़कंप मच गया। कई लोगों ने खुद ही अपना सामान हटा लिया, जबकि बाकी बची दुकानों और झोपड़ियों पर जेसीबी चलाकर प्रशासन ने उन्हें जमींदोज़ कर दिया।

👉 मुख्य बिंदु :

  • स्टेशन परिसर के अवैध होटल और ठेलों पर कार्रवाई
  • प्रशासन की 20 लोगों की टीम मौके पर मौजूद
  • अतिक्रमण जमींदोज़; जेसीबी और ट्रैक्टर का इस्तेमाल
  • यात्रियों ने ली राहत की सांस; दोबारा अतिक्रमण न हो, ऐसी उम्मीद

कुचंबना खत्म होगी?

पूर्णा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 के सामने का मैदान और संजय गांधी नगर क्षेत्र के पास कई दिनों से होटल वाले, चायवाले और पानठेला लगाने वालों ने कब्जा जमाया हुआ था। सड़क के दोनों ओर ठेले और अस्थायी निर्माण होने से यात्रियों का रास्ता संकरा हो गया था। भीड़भाड़ के समय महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को खासा कष्ट झेलना पड़ता था। इस वजह से प्रशासन के खिलाफ नागरिकों में नाराज़गी भी बढ़ रही थी।

अधिकारी व कर्मचारियों की टीम ने संभाली मोर्चा

इस कार्रवाई के लिए रेलवे प्रशासन ने आई.ओ.डब्ल्यू. उदयकुमार, पी.डब्ल्यू. अरुण कुमार, स्वच्छता निरीक्षक और रेसुब बल प्रमुख समेत 10 से 20 लोगों की टीम उतारी। अतिक्रमणकारियों को पहले ही अपना सामान हटाने की सूचना दी गई थी। लेकिन कुछ ने ध्यान नहीं दिया, तो प्रशासन ने टीनशेड, तंबू, लकड़ी के ढांचे और डाले गए भराव को हटाने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर का सहारा लिया।कार्रवाई के दौरान इलाके में देखने वालों की भारी भीड़ उमड़ आई। नागरिकों ने इस मुहिम का स्वागत करते हुए कहा कि “प्रशासन ने सही समय पर सही कदम उठाया है।”

रेलवे ने किया, तो पालिका क्यों नहीं?

रेलवे स्टेशन परिसर शहर के लिए महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है। यात्रियों और नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित माहौल देने के लिए यह कार्रवाई निर्णायक मानी जा रही है। लेकिन भविष्य में फिर से अतिक्रमण न हो, इसके लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता है।
इसी बीच नागरिकों ने यह भी मांग की है कि नगर पालिका प्रशासन को भी रेलवे की तरह सख्ती दिखाते हुए मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर बढ़ते अतिक्रमण को हटाना चाहिए, ताकि यात्रियों की परेशानी खत्म हो सके।


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